नींव में दरारें क्यों आती हैं?
नींव मिट्टी के नीचे होती है और रोज़ पानी के संपर्क में आती है।
बारिश से ज़मीन गीली होकर दीवारों पर दबाव डालती है।
मौसम बदलने पर मिट्टी खिसकती है जिससे नींव में खिंचाव आता है।
खराब मिश्रण से पानी अंदर रिसता है।
पेड़ों की जड़ें भी नींव को हिला देती हैं।
इससे छोटी दरारें बड़ी हो जाती हैं।
काम की बात: बारिश के बाद घर के चारों ओर घूमकर ज़मीन के पास पतली रेखाएं देखें। |
नींव की दरारें ठीक करने के तरीके
नींव की दरारें ठीक करने के लिए बस कुछ औज़ार चाहिए। पहले दरार साफ़ करें, फिर उसे सही से भरें।
1. वायर ब्रश से गंदगी साफ़ करें।
2. दरार को पानी से गीला करें ताकि मसाला चिपक जाए।
3. कन्नी से सीमेंट मसाला गहराई तक भरें।
4. ऊपर से बराबर करके दो दिन छांव में सूखने दें।
इससे नींव मज़बूत रहेगी।
ज़रूरी टिप: मसाला मिलाते वक्त दस्ताने पहनें। |
नींव की वॉटरप्रूफिंग के तरीके
दरारें भरने के बाद तुरंत वॉटरप्रूफिंग करें। इसके कुछ तरीके हैं:
1. बाहरी दीवारों पर पेंट की मोटी परत लगाएं। ये बारिश से बचाती है।
2. बेसमेंट के अंदर सील स्प्रे इस्तेमाल करें। ये पानी को रोकता है।
3. दरारों पर चिपकने वाली मेम्ब्रेन लगाएं।
बिना बारिश वाले दिन दो कोट लगाएं। ज़्यादातर घरों के लिए खर्च ₹10,000 से ₹20,000 तक आता है।
बेसमेंट के लिए:
1. पानी जमा होने वाली जगह छोटे छेद करें।
2. अंदर से सीलेंट भरें।
3. दीवारों को ऊपर से नीचे तक कोट करें।
एक्सपर्ट टिप: पाइप से पानी डाल कर चेक करें कि कहीं लीकेज तो नहीं। |
नींव को सालों-साल मज़बूत रखें
साल में एक बार नींव चेक करें और छोटी दरारों को तुरंत भरें। अच्छी वॉटरप्रूफिंग बाद में होने वाले ₹30,000 के बड़े खर्चों को बचाती है। सूखी नींव भारी बारिश और गर्मी में भी मज़बूत रहती है।