निरंतर घटती दूरियां

बांद्रा-वर्ली सी लिंक, जिसे ‘राजीव गांधी सी-लिंक’ का नया नाम दिया गया है, 4.7 किमी लंबा, जुड़वां 4-लेन कैरिजवे है जिसका निर्माण अत्याधुनिक सेगमेंटल प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया गया है। इस परियोजना ने एकमात्र अपने दम पर भारत में संरचनात्मक संभावनाओं की परिधि को विस्तारित किया है। यह संभवतः देश की सर्वाधिक महत्वाकांक्षी अवसंरचना परियोजना है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट को अल्ट्राटेक द्वारा भौतिक सामर्थ्य प्रदान की गई है। इस परियोजना के लिए सीमेंट की गुणवत्ता अत्यधिक उत्कृष्ट स्तर की होनी चाहिए क्योंकि इसके स्तंभों को समुद्र की लहरों के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। इसलिए, 'अल्ट्राटेक सीमेंट' का विकल्प चयन किया जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं थी।

यह परियोजना मुंबई के नगर व्यावसायिक केंद्र को एक पुल के माध्यम से उपनगरों से जोड़ती है जिसके स्तंभ अरब सागर में स्थित हैं। इसने यात्रा के समय को उल्लेखनीय रूप से अत्यधिक कम कर दिया है और माहिम कॉज़वे पर यातायात की भीड़ कम करने में भी सहायता की है। यह सी-लिंक मुंबई के निवासियों को तेज और सुरक्षित आवागमन प्रदान करता है। और अल्ट्राटेक को भारत की सबसे महत्वाकांक्षी अवसंरचना परियोजनाओं में से एक को अपनी भौतिक सामर्थ्य प्रदान करने पर गर्व है।

0.1 मिलियन मीट्रिक टन अल्ट्राटेक सीमेंट का उपयोग किया गया

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