पर्यावरण के अनुकूल बनें

भारत में आवास क्षेत्र तीव्र गति से बढ़ रहा है और अर्थव्यवस्था के विकास में अत्यधिक योगदान दे रहा है। यह देश के लिए शुभ संकेत है और अब इस क्षेत्र में हरित अवधारणाओं और तकनीकों को पेश करने की तत्काल आवश्यकता है, जो एक स्थायी तरीके से विकास में सहायता कर सकते हैं। आवासीय क्षेत्र में हरित अवधारणाएं और तकनीक राष्ट्रीय मुद्दों जैसे उपभोक्ता कचरे से निपटने, जल दक्षता, जीवाश्म ईंधन में कमी, आने-जाने में उपयोग, ऊर्जा दक्षता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद कर सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अवधारणाएं रहने वाले के स्वास्थ्य, खुशी और कल्याण को बढ़ा सकती हैं।

 

ग्रीन होम का उद्देश्य ऊर्जा कुशल, जल कुशल, स्वस्थ, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल घरों के निर्माण को सुगम बनाना है।

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ऊर्जा दक्षता

आवासीय क्षेत्र विद्युत ऊर्जा का एक बड़ा उपभोक्ता है। ग्रीन होम ऊर्जा कुशल प्रकाश व्यवस्था, एयर कंडीशनिंग सिस्टम, मोटर, पंप आदि के माध्यम से ऊर्जा की खपत को कम कर सकते हैं, रेटिंग प्रणाली ग्रीन होम को प्रोत्साहित करती है, जो बीईई लेबल वाले उपकरण और उपकरणों का चयन और उपयोग करते हैं। इस रेटिंग कार्यक्रम को अपनाने से ऊर्जा की बचत 20 से 30% तक हो सकती है।

जीवाश्म ईंधन का कम उपयोग

जीवाश्म ईंधन दुनिया भर में धीरे-धीरे समाप्त होने वाला संसाधन है। परिवहन के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत रहा है। रेटिंग प्रणाली परिवहन और कैप्टिव बिजली उत्पादन के लिए वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।

वर्जिन सामग्री पर कम निर्भरता

रेटिंग प्रणाली परियोजनाओं को पुनर्नवीनीकरण और पुन: उपयोग की गई सामग्री का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है और कुंवारी लकड़ी के उपयोग को हतोत्साहित करती है, जिससे कुंवारी सामग्री के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को संबोधित किया जाता है। कुंवारी लकड़ी के कम उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाता है।

रहने वालों का स्वास्थ्य और कल्याण

रहने वालों का स्वास्थ्य और कल्याण ग्रीन होम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। आईजीबीसी ग्रीन होम्स रेटिंग सिस्टम दिन की रोशनी और वेंटिलेशन पहलुओं का न्यूनतम प्रदर्शन सुनिश्चित करता है, जो एक घर में महत्वपूर्ण हैं। रेटिंग प्रणाली इनडोर वायु प्रदूषकों को कम करने के उपायों को पहचानती है।

IGBC ग्रीन होम्स निम्नलिखित श्रेणियों के अंतर्गत पर्यावरण अनुकूल विशेषताओं को संबोधित करता है

    ऊपरी मिट्टी के इकट्ठा करें और भराई के लिए बाद में पुन: उपयोग करें या इसका उपयोग किसी अन्य साइट पर भराई के कार्य हेतु किया जा सकता है।

    खुले एरिया को अपनी आवश्यकता के अनुसार तैयार किया जा सकता है (जैसे, घास, पेड़, झाड़ियाँ)। पक्के एरिया पर पारगम्य फ़र्श बनाया जा सकता है। अभेद्य सतहों के लिए अपवाह को वर्षाजल संग्रहण के गड्ढों की ओर निर्देशित करें।

    साइट की प्राकृतिक स्थलाकृति और / या साइट एरिया के कम से कम 15% डिजाइन परिदृश्य को बनाए रखने से साइट पर किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

    सूचना:

    पार्किंग एरिया, पैदल मार्ग आदि को साइट की गड़बड़ी माना जाता है।

    यहाँ लैंडस्केप से तात्पर्य सॉफ्ट लैंडस्केपिंग से है जिसमें केवल वानस्पतिक पदार्थ शामिल हैं।

    प्राकृतिक स्थलाकृति का व्यापक अर्थ भूखंड की प्राकृतिक विशेषताओं का संरक्षण करना है।

    छत, तहखाने आदि जैसी निर्मित संरचनाओं के ऊपर लैन्ड्स्कैप वाले क्षेत्र को लैन्ड्स्कैप क्षेत्र की गणना के लिए उपयोग नही किया जा सकता है।

    गमले में लगे पौधों को लैंड्स्केप नहीं माना जाएगा।

    माइक्रॉक्लाइमेट पर प्रभाव न्यूनतम करने के लिए हीट आइलैंड (विकसित और अविकसित क्षेत्रों के बीच तापीय प्रवणता) को कम करें।

    उच्च सौर परावर्तकता और तापीय उत्सर्जन (जैसे, व्हाइट चाइना मोज़ेक या व्हाइट सीमेंट टाइलों या कोई अन्य अत्यधिक परावर्तक सामग्री) वाले मैटेरियल का उपयोग करें और / या खुले छतों के भाग में से कम से कम 50% को वनस्पति से कवर करें।

    ऊर्जा की बचत को अधिकतम करने और हीट आइलैंड के प्रभाव को कम करने के लिए, ऐसे मैटेरियल का उपयोग करें जिनका परावर्तन और उत्सर्जन उच्च हो। हीट आइलैंड प्रभाव को कम करने के लिए हरित छतों का निर्माण करें या छतों पर अत्यधिक परावर्तक मैटेरियल का उपयोग करें। उच्च परावर्तक गुणों वाले विशिष्ट मैटेरियल में चाइना मोज़ेक, व्हाइट सीमेंट टाइलें, उच्च सौर परावर्तक सूचकांक (एसआरआई) वाले पेंट आदि शामिल हैं।

वर्षा जल संचयन (वर्षा जल इकट्ठा करना):

छत की सतहों से बहने वाले वर्षा जल में से कम से कम 50% इकट्ठा करने के लिए वर्षा जल संचयन या भंडारण प्रणाली स्थापित करें। तटीय क्षेत्रों में जहां भूजल का स्तर काफी ऊपर होता है और पानी का भूमि में रिसाव सीमित है, उपरोक्त आवश्यकता को पूरा करने के लिए संग्रहण टैंक स्थापित किये जा सकते हैं। छतों से वर्षा जल को संग्रहित करें ताकि उसका उपयोग किया जा सके। डिजाइन में फ्लशिंग व्यवस्था भी होनी चाहिए ताकि शुरूआती कुछ बारिशों में शामिल अशुद्धियों को बाहर निकालना जा सके। इस तरह के प्रदूषकों और अशुद्धियों में कागज़ के टुकड़े, पत्ते, पक्षियों की लीद, धूल आदि शामिल हैं।

कुशल वाटर फिक्स्चर:

कुशल वाटर फिक्स्चर को बनाकर घर के भीतर जल के उपयोग को कम किया जा सकता है।

*वाटर फिक्स्चर चुनते समय ध्यान दें कि उसकी प्रभावकारिता अच्छी हो। प्रोड्क्ट कैटेलॉग या ब्राउचर में विभिन्न दबावों पर प्रवाह की दरों वर्णन होगा।

    अत्यधिक उच्च दक्षता वाले फिक्स्चर भी उपलब्ध हैं जो जल खपत की मात्रा को काफी हद तक कम कर सकते हैं। ** आदर्श घरों में बेसलाइन फ्लो रेट / वाटर फिक्स्चर की क्षमता **

वस्तुएँ इकाइयां आधारभूत औसत प्रवाह दरें / क्षमता
फ्लश फिक्स्चर LPF 6/3
प्रवाह फिक्स्चर एलपीएम २०२०

* 3 बार परिमाण के बहते जल के दबाव पर

नोट:

    फ्लो फिक्स्चर में टोंटी, बेसिन मिक्सर, नल, शॉवर, शॉवर मिक्सर शामिल हैं।

    बेसलाइन फ्लो को 3 bar के प्रैशर पर बहते पानी द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। 3bar के प्रैशर पर बहते पानी का मतलब यह नहीं है कि पूरी बिल्डिंग में पानी की आपूर्ति 3 बार पर है। बिल्डिंग फिक्स्चर कम प्रैशर पर भी काम कर सकते हैं लेकिन इस क्रेडिट के तहत इसकी कार्यक्षमता प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन फ्लो रेट 3 Bar पर प्रस्तुत की जानी चाहिए।

    औसत फ्लो रेट सभी संबंधित फ्लश / फ्लो फिक्स्चर का एक सरल अंकगणितीय औसत है।

सूखे के प्रति सहनशील प्रजातियाँ:

लैंडस्केप को पानी की न्यूनतम खपत सुनिश्चित करते हुए डिजाइन किया जाना चाहिए। सुनिश्चित करें कि कम से कम 25% लैंडस्केप पर पौधों की सूखे के प्रति सहनशील प्रजातियाँ लगाई गई हों।

नोट:

    केवल उन प्रोजेक्टों के लिए लागू होता है, जिनकी साइट / प्लॉट का कम से कम 15% लैंडस्कोप हो।

    सूखे के प्रति सहनशील प्रजातियाँ पौधों की वे प्रजातियां हैं जिन्हें अनुपूरक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है।

    आमतौर पर, दो वर्ष में केवल एक बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।

सीएफसी फ्री उपकरण:

ऐसे रेफ्रिजरेंट और ओजोन लेयर को घटाने वाली गैसों का उपयोग नही करना चाहिए जो पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालते हों।

    हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर-कंडीशनिंग (HVAC) उपकरणों और इन्सटॉल किये गये यूनिटेरी एयर-कंडीशनर में इस्तेमाल होने वाले रेफ्रिजरेंट सीएफसी-फ्री होने चाहिए।

    सभी सीएफसी-फ्री एचवीएसी सिस्टमों के लिए बाजार का सर्वेक्षण करें। ऐसे सिस्टम कम क्षमताओं में भी उपलब्ध हैं। एचवीएसी उपकरण इन्सटॉल करें, जिनमें सीएफसी वाले रेफ्रिजरेंट का उपयोग नहीं किया जाता है।

एनर्जी परफोर्मेंस:

    अत्यधिक एनर्जी उपयोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए भवन की एनर्जी दक्षता को ऑप्टिमाइज़ करें।

    बिल्डिंग ओरिएंटेशन, एनवेलॉप, सिस्टम, लाइटिंग और अन्य उपकरणों को शामिल करने के लिए हॉलिस्टिक एनर्जी वाले दक्षता दृष्टिकोण पर विचार करें।

    एनर्जी परफोर्मेंस के लिए बाजार में उपलब्ध सामग्रियों और उपकरणों तथा उनके गुणों को पहचानें। इन सामग्रियों और उपकरणों का चयन करते समय, उनसे पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी विचार करें।

    सामग्री चुनने के संबंध में निर्णय प्रारंभिक लागत के बजाय जीवन चक्र मूल्यांकन दृष्टिकोण पर आधारित हो सकता है।

    उन एप्लिकेशनों पर ध्यान दें जो ऑटोमेटिक कंट्रोल के माध्यम से एनर्जी की बचत में मदद कर सकते हैं। कंट्रोलों का विवरण प्राप्त करें और उचित रूप से स्थापित करें।

एप्लायंस:

प्रस्तावित बिल्डिंग में एनर्जी की खपत को कम करने के लिए एनर्जी बचाने वाले एप्लायन्सों के उपयोग को प्रोत्साहित करें।

    इन्सटॉल/ उपयोग किए जाने वाले एप्लायन्सों की बीईई लेबलिंग कम से कम तीन स्टार वाली होनी चाहिए।

    बाईई द्वारा रेट किए गए एप्लायन्सों की सूची बाईई की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है http://www.bee-india.nic.in/

सौलर वॉटर हीटिंग सिस्टम:

बिल्डिंग में वाटर हीटिंग एप्लिकेशनों के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करें।

    घरेलू कार्यों के लिए गर्म पानी की आवश्यकता को पूरा करने हेतु सौलर वाटर हीटिंग सिस्टम स्थापित करें। घरेलू कार्यों के लिए न्यूनतम गर्म पानी की आवश्यकता को प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रति दिन 25 लीटर पानी के अनुसार गणना की जानी चाहिए।

प्रकाश के लिए कुशल व्यवस्था और लाइटिंग पावर डेन्सिटी:

घर के भीतर ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए एनर्जी एफिसिएंट लाइटिंग सिस्टमों के उपयोग को प्रोत्साहित करें।

    आंतरिक और बाहरी प्रकाश व्यवस्था के लिए (आवश्यकतानुसार) ऐसे एनर्जी एफिसिएंट लाइटिंग उपकरण इन्सटॉल करें, जिन्हें बीईई लेबलिंग के तहत कम से कम 3 स्टार से रेट किया गया हो।

    कुछ एनर्जी एफिसिएंट लाइट फिटिंग हैं: इलेक्ट्रॉनिक बैलास्टिक वाली एफिसिएंट फ्लोरोसेंट लाइट फिटिंग, T5 लैंप, कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लाइट फिटिंग, लाइट एमिटिंग डायोड आदि।

अन्य:

    ओवरहेड वॉटर टैंक में लेवल कंट्रोलर।

    3 एचपी से अधिक क्षमता वाले पंपों के लिए न्यूनतम दक्षता 60% और आईएसआई रेटेड हों।

    3 एचपी से अधिक क्षमता वाली मोटरों लिए न्यूनतम दक्षता 75% और मोटर आईएसआई रेटेड हों।

    रसोई / कैफेटेरिया में आईएसआई रेटेड गैस बर्नर ।

    निम्नलिखित क्षेत्रों को कवर करने के लिए लाइटिंग कंट्रोल के मूवमेंट सेंसर: शौचालय, अध्ययन कक्ष, सीढ़ियां, स्टेयर केबिन, कॉरिडोर, गेराज, बालकनी, धुलाई और स्टोरेज एरिया।

    आंतरिक और बाहरी लाइटिंग के लिए आवश्यकतानुसार डिम्मर कंट्रोल / डेलाइट कट-ऑफ सेंसर।

    बेडरूम में एयर कंडीशनर के लिए स्लीप मोड कंट्रोल।

कचरे का पृथक्करण:

शुरूआत में ही कचरे को अलग-अलग करना ताकि ऐसे कचरे को भूमि पर न फैलाया जा सके।

    जैविक कचरे, प्लास्टिक और पेपर को इकट्ठा करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति घर पर अलग कूड़ेदान स्थापित करना।

    उपरोक्त के अलावा बहु-आवासीय यूनिटों में, कचरे को इकट्ठा करने के लिए एक कॉमन स्थान भी प्रदान किया जाना चाहिए जिसमें निम्नलिखित कवर होने चाहिए:

    धातु (टिन और डिब्बे)

    'ई - कचरा

    लैम्प

    बैटरी

सूखे और गीले कचरे को छांटने के लिए उपयुक्त जगह निर्धारित करें। बिल्डिंग के मलबे और आवासीय कचरे के रिसाइकलिंग के लिए स्कोप की जांच करें। कांच, प्लास्टिक, पेपर, समाचार पत्र, कार्डबोर्ड, जैविक कचरे और 'ई' कचरे व बैटरियों जैसे अपशिष्ट पदार्थों के स्थानीय डीलरों का पता लगाएँ।

कन्सट्रक्शन संबंधी कचरे को कम करना:

    कन्सट्रक्शन संबंधी कचरे का भराई के लिए उपयोग किया जा सकता है। कन्सट्रक्शन के दौरान उत्पन्न होने वाले कचरे को लैंडफिल और भट्टी के लिए उपयोग करके 75% तक कम किया जा सकता है।

    साइट पर उत्पन्न सारे कन्सट्रक्शन मलबे को इकट्ठा करें। इन कचरे को उनकी उपयोगिता के आधार पर अलग-अलग करें। ऐसे कचरे को मैन्यूफेक्चरिंग यूनिटों में भेजने पर उनका कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जा सकता है। आवासीय प्रोजेक्टों के कन्सट्रक्शन मलबे को टूटी ईंटें, स्टील रॉड, टूटी टाइलें, कांच, लकड़ी के कचरे, पेंट के डिब्बे, सीमेंट की थैलियों, पैकिंग सामग्री आदि के रूप में अलग-अलग किया जा सकता है।

रिसाइकिल्ड सामग्री के साथ मैटेरियल:

ऐसे उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करना जिनमें रिसाइकिल होने वाली सामग्री होती है और नये मैटेरियल का उपयोग करने से पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम पड़ते हैं।

    रिसाइकिल सामग्री वाले कुछ मैटेरियल फ्लाई ऐश ब्लॉक, टाइलें, स्टील, ग्लास, सीमेंट, फॉल्स सीलिंग, एल्यूमीनियम और कम्पॉसिट वुड़ हैं।

शीघ्र नवीकरणीय मैटेरियल:

    उन मैटेरियलों का उपयोग का अधिकतम उपयोग करना, जो शीघ्रता से नवीकरणीय हैं। ऐसे शीघ्र नवीकरणीय बिल्डिंग मैटेरियल और प्रोड्क्टों का उपयोग करें (पौधों से बने जिन्हें आमतौर पर दस वर्ष या उससे भी कम समय में फिर प्राप्त किया जा सकता है ) जिनमें नवीकरणीय मैटेरियल की मात्रा बिल्डिंग मैटेरियल की लागत का कम से कम 2.5% हो।

    बांस, ऊन, कॉटन इन्सुलेशन, एग्रीफाइबर, लिनोलियम, व्हीट बोर्ड, स्ट्रॉबोर्ड और कॉर्क जैसी सामग्रियों का उपयोग करें। कन्सट्रक्शन के दौरान, सुनिश्चित करें कि निर्दिष्ट शीघ्र नवीकरणीय मैटेरियल का उपयोग किया जाये।

##लोकल मैटेरियल:

स्थानीय तौर पर उपलब्ध बिल्डिंग मैटेरियल के उपयोग को प्रोत्साहित करें जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम पड़े। सुनिश्चित करें कि बिल्डिंग में प्रयोग किये जाने वाले बिल्डिंग मैटेरियल की कुल लागत 50% भाग 500 किमी के दायरे में मैन्यूफेक्चर किया गया हो।

बचे हुए मैटेरियल का पुन: उपयोग:

    बचे हुए बिल्डिंग मैटेरियल और प्रोड्क्टों के उपयोग को प्रोत्साहित करें ताकि नये मैटेरियलों की माँग को कम किया जा सके और जिससे नये मैटेरियलों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़े प्रभाव कम हो सके।

    सुनिश्चित करें कि बिल्डिंग में उपयोग किये गये कुल बिल्डिंग मैटेरियल का कम से कम 2.5% भाग बचा हुआ, रिफर्बिश किया हुआ हो और पुन: उपयोग किया जा रहा हो। बिल्डिंग डिजाइन में बचे हुए मैटेरियल का उपयोग करने के तरीके ढूंढें और फ्लोरिंग, पैनलिंग, दरवाजे, फ्रेम, फर्नीचर, ईंटों इत्यादि जैसे बचे हुए मैटेरियलों का प्रयोग करें।

    नई लकड़ी का कम से कम उपयोग करें जिससे वनों की कटाई में भी कमी आये।

    धूम्रपान से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से धूम्रपान न करने वालों का बचाव करना। बिल्डिंग के कॉमन एरिया में धूम्रपान निषेध होना चाहिए।

    कॉरिडोर, लॉबी, लिफ्ट आदि जैसे कॉमन एरियों में धूम्रपान पर प्रतिबंध होना चाहिए, बिल्डिंग को इस हिसाब से डिज़ाइन करें कि कॉमन एरियों में तंबाकू के धुएं के प्रदूषण को खत्म या कम किया जा सके। निवासी दिशानिर्देशों में भी यह निर्दिष्ट कर सकते हैं कि धूम्रपान करने वालों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तंबाकू का धुआं कॉमन एरिया या अन्य आवासीय यूनिटों में लीक न हो। निवासियों और आगंतुकों को जानकारी देने के लिए बिल्डिंग परिसर में कई स्थानों पर संकेत लगाए जा सकते हैं।

  • डे-लाइटिंग:
  • अच्छी डे-लाइटिंग प्रदान करके आंतरिक और बाहरी वातावरण के बीच संपर्क सुनिश्चित करें:
  • प्रत्येक लीविंग स्पेस पर 2% का न्यूनतम ग्लेज़िंग फैक्टर प्राप्त करें। रेगुलर तौर पर ऑक्यूपाई सारे स्पेस के कुल फ्लोर एरिया का 50% जिसमें किचन, लिविंग रूम, बेड रूम, डाइनिंग रूम और स्टडी रूम शामिल हैं। औसत ग्लेज़िंग फैक्टर की गणना नीचे दिए गए फॉर्मूले का उपयोग करके की जा सकती है: ग्लेज़िंग फैक्टर= विंडो एरिया(SF) / फ्लोर एरिया (SF) x वास्तविक बिजिबल ट्रांसमिट्टेंस x कॉन्सटेंट

  • कॉन्सटेंट का मान:
  • दीवार पर विंडो: 0.2 *छत पर विंडों (स्काईलाइट) : 1.0

  • नोट:
  • बड़े साइज वाले लीविंग स्पेस के लिए एरिया के उस हिस्से को गणना में शामिल किया जा सकता है, जहाँ डे-लाइटिंग पर्याप्त मात्रा में पहुँचती हो। कई कार्यों के लिए उपयोग किये जाने वाले लीविंग स्पेस जैसे डाइनिंग और ड्राइंग, को फ़ंक्शन के आधार पर अलग-अलग स्पेस माना जा सकता है। अलग करने वाली बाउंडरी का भौतिक बाउंडरी होना जरूरी नही है।
  • ##फ्रेश एयर वेंटिलेशन:
  • पर्याप्त एयर वेंटिलेशन प्रदान करके इनडोर एयर की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले इनडोर प्रदूषकों से बचा जा सकता है।
  • लीविंग स्पेस, रसोई और बाथरूम में खुलने वाली खिडकियाँ या दरवाजे लगायें, और सुनिश्चित करें कि खुलने योग्य एरिया को नीचे दी गई तालिका में उल्लिखित मानदंडों को पूरा करते हुए डिज़ाइन किया गया हो: खुलने वाली खिड़कियों और दरवाजे के लिए डिजाइन मानदंड
  • स्थान का प्रकार कुल कालीन क्षेत्र के प्रतिशत के रूप में खुला क्षेत्र रहने का स्थान 10% रसोई 8% बाथरूम 4%
  • पर्याप्त विंडो ओपनिंग होने से बिल्डिंग में फ्रेश एयर आने में मदद मिलेगी, जिससे वायु की गुणवत्ता अच्छी रहेगी। क्रॉस-वेंटिलेशन के लिए कम से कम दो अलग-अलग दिशाओं में बड़ी ओपनिंग होनी चाहिए।

  • एग्ज़हॉस्ट सिस्टम:
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि इन्डोर वातावरण को बेहतर बनाने के लिए रसोई और बाथरूम बेहतर हवादार हैं:
  • घरों के भीतर इन्डोर एयर क्वालिटी को बनाये रखने के लिए बाथरूम और रसोई में एग्ज़ॉस्ट होना बहुत महत्वपूर्ण है। यहां केवल एग्ज़ॉस्ट फैन लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन सिस्टमों का आकार भी इन्डोर एयर की पर्याप्त मात्रा को शुद्ध करने के लिए महत्वपूर्ण और इसी से इनडोर एयर की क्वालिटी का निर्धारण होता है।

  • न्यूनतम आंतरायिक एग्ज़ॉस्ट फ्लो संबंधी आवश्यकताएँ
  • स्थिति न्यूनतम वायु प्रवाह   न्यूनतम वायु प्रवाह रसोई <9.3 वर्ग मीटर (100 वर्ग फीट) के लिए फर्श क्षेत्र 100 सीएफएम > 9.3 वर्ग मीटर (100 वर्गमीटर) के लिए आनुपातिक रूप से वायु प्रवाह में वृद्धि बाथरूम <4.64 वर्ग मीटर (50 वर्ग फुट) फर्श क्षेत्र के लिए 50 सीएफएम > 4.64 वर्ग मीटर (50 वर्गमीटर) के लिए आनुपातिक रूप से वायु प्रवाह में वृद्धि
  • लो वीओसी मैटेरियल:
  • कम उत्सर्जन वाले मैटेरियलों के उपयोग को प्रोत्साहित करना ताकि बिल्डिंग निवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सके:
  • बिल्डिंग में पेंट, एड्हेसिव और सीलेंट के उपयोग के बाद और निवास करने से पहले सभी खिड़कियों को खुला रखते हुए दस दिनों तक बिल्डिंग फ्लश आउट किया जाना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि बिल्डिंग में निवास से पहले परिसर वायु जनित दूषित पदार्थों से मुक्त हो गया है।

    क्रॉस वेंटिलेशन सुनिश्चित करने के लिए आवास इकाइयों के बीच पर्याप्त स्पेस होना चाहिए कई बार, इस पहलू पर ध्यान नही दिया जाता है जिससे इनडोर एयर और डे-लाइटिंग दोनों के मामले में खराब इनडोर वातावरण उत्पन्न हो सकता है। संकीर्ण कॉरिडोर से भी इन्डोर वातावरण प्रभावित हो सकता है।

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